उत्तम खेती मध्यम बान , करे चाकरी कुक्कर निदान ” अर्थात उत्तम खेती (कृषि कार्य )हमारे समाज में सर्वोत्तम कार्य है , माध्यम बान( व्यापार) – व्यापार को मध्यम स्तर का कार्य कहा गया है । चाकरी माने नौकरी को निकृष्ट कार्य कहा गया है इसे कुत्ते की तरह दुम हिलाने जैसी संज्ञाएँ हमारे बुजुर्ग देते आये हैं । सदियों से चली आयी ये भारतीय अवधारणा आज बिलकुल उलटी हो गयी है। और जब से हमने इसे उलटा है हम विनाश की ओर ही अग्रसर हो रहे हैं । अगर इस कहावत को सही परिपेक्ष्य में हमारा समाज और हमारे राजनेता समझ लें तो देश की अनेकों समस्याएं चुटकियों में सुलझ जाएँ । आज खेती सबसे निकृष्ट कार्य है , व्यापार अब भी मध्यम ही है किंतु नौकरी अब सर्वोत्तम कार्य है। चाहे किसी बड़े किसान का बच्चा हो या किसी बड़े व्यापारी का बच्चा सभी का सपना अब एक अच्छी नौकरी करना ही रह गया है । अमर शहीद श्री राजीव भाई हमेशा कहते थे भारतीय समाज कभी भी कंपीटिटिव या प्रतिस्पर्धी नहीं रहा हम तो कोआपरेटिव यानि सहयोगी समाज रहे हैं। और इसकी अवधारणा यही रही की हमने खेती को उत्तम माना क्योंकि खेती में प्रतिस्पर्धा नहीं होती सिर्फ स...