आज हम दो गंभीर समस्याओ
पर विश्लेषण करेंगे , एक तो है गौ रक्षा
, संवर्धन और पालन और दृतीय
है प्रारंपरिक प्राकृतिक विष मुक्त खेती , पर शुरू करने से पहले कह दू की ये , विडियो और ये जो मेरे चैनल है कुनाल सरकार ये पूरा का पूरा देश हित और समाज हित
के लिए है , आप जो ये विडियो देख
रहे है इसको देखने से और आप की साहयता से मने आपके सपोर्ट से इस चैनल को सब्सक्राइब
करने से जो भी इनकम होगी , आय होगी ,
कमी होगी वह पूरा का पूरा सीधे सीधे गरीब बचो की
सेवा , उनकी पढाई और उनकी सहायता
के लिए और वृद्धो की सहायता के लिए जो की वृधाश्रम में रहते है जो इस जीवन के अंतिम
यात्रा के लिए वह आपना जीवन बिता ते है आपने परिवार और समाज से दूर , ऐसो की सेवा के लिए गौमाता की रक्षा के लिए गौशाला
और , गौसंवर्धन के आदि करो के लिए
उनको दिया जायेगा , आप की थोड़ी से हेल्प
, मदद और सहायता से इनकी सहायता
हो सकती है , कुछ का भला हो सकता
है य्यानी पुर का पूरा डोनेशन और charity को ये जाये गा अप्पकी सहायता से इनकी सहायता
होगी, आपके
आज के समय में जो
की स्वतंत्रता के पश्चात भारत में बहुत अधिक मात्र में गौमाता के ऊपर शोषण ,
हिंसा , अत्यचार और उनका कतल
हो रहा है , जो की थमने का नाम
नहीं है , इसी में कुछ लोगो ने भारत
में गौमाता की रक्षा के लिए संस्था और गौसंवर्धन और गोपालन करने के लिए गौशाल्ये और
organization प्ररभा किये है , और चल रहा है , उनमे से एक है ये
फेडरिक एरीना ,
पिछले 25 वर्षो से गौ सेवा में तत्पर ...हमारे भारत में
यु तो कई संसथान है पर यहाँ कुछ विशेष है , फेडरिक एरीना ब्रुने ने 40 साल पहले भारत
अपने देश जेर्मनी
से आई थी , और यहाँ के हो कर रह गई ,
उनका ये संसथा अभी उत्तरप्रदेश में स्थित मथुरा
में है जो की 25 वर्षो से गौ
सेवा में तत्पर है
, जिन्हें पद्मा श्री प्पुरुस्कर
मिलने वाला है , और दूसरी तरफ हमारे
किसान भाईओ में से एक है भारत भूषण , जो की बुलंद
शहर में रहते है ,,
जिन्हें पद्मा श्री प्पुरुस्कर मिलने वालो में दृतीय
स्थान प्राप्त है , जहा आज कल हमारा आन्न
ही विष के सामान हो जरह है
हर जगह फेर्तिलिसेर
और पस्तीसाईट की भरपूर रूप से उपयोग हो रहा है जिससे हमारे जीवन में कई प्रकार की रोग
, व्याधिय , और स्वाथ्य
हनी हो रही है ,
वही जहा दिन बा दिन गोबर खाद से बनी सब्जिय और खान
पान की वस्तुओ की मांग हो रही है , अधिक मात्र में
इसमें भारत भूषण जी
प्रयास रत है , जहा विष मुक्त खेती
होगी वही स्वस्थ्य हो गा ,, जहा एक जगह फेर्तिलिसेर
और पस्तीसाईट से खेती
की जाती है वही भारत
जी परम्परिक रुपी , गौमाता से प्राप्त
गोबर , गौमूत्र से प्राकृतिक खाद
से काम कर रहे है , श्री राजीव दीक्षित
जी ने
भी इसपर बहुत जोर
दिया था और हमारे शहर के पास ही में महाराष्ट्र राज्या है वही के वर्धा शहर में तो
इस पारकर की खेती का प्रचालन कई वर्षो से हो रहा है , श्री राजीव दीक्षित जी के उस वाक्यों को आप सुन सकते है और समझ
सकते है उनका उस विडियो का लिंक मै आपने discription box में दे दिया है आप वह
से इस विडियो को देख सकते ही और भारत के कई किसानो ने अभी भी पूरी
ईमानदारी से ये कार्य
कर रहे है , ये आज के वर्तमान
समय में ये दोनों ही गौसेवा और पारंपरिक प्रक्रितक विष मुक्त खेती दोनों का ही सकत
आवश्यकता है ... तो चलिए देखते है ..ये रिपोर्ट जो जी न्यूज़ से में दी गई है
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